हाइपोथायरायडिज्म (अंडरएक्टिव थायराइड)

By | October 24, 2018

ओवरव्यू

हाइपोथायरायडिज्म (अंडरएक्टिव थायराइड) एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपकी थायराइड ग्रंथि कुछ महत्वपूर्ण हार्मोन्स का पर्याप्त उत्पादन नहीं करती है.

६० वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं में हाइपोथायरायडिज्म की समस्या होने की अधिक संभावना होती हैं. हाइपोथायरायडिज्म आपके शरीर में रासायनिक प्रतिक्रियाओं के सामान्य संतुलन को गड़बड़ कर देता है. कभी – कभी शुरुआती चरण में इसके लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन समय के साथ, इलाज न कराए जाने की स्थिति में हाइपोथायरायडिज्म मोटापा, जोड़ों का दर्द, बांझपन और हृदय रोग जैसी कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है.

अच्छी खबर तो यह है कि हाइपोथायरायडिज्म की पहचान करने वाले सटीक थायरॉइड परीक्षण उपलब्ध हैं, और जैसे ही आपके डॉक्टर और आपको अपनी सही खुराक का पता चल जाता है वैसे ही सिंथेटिक थायरॉइड हार्मोन की मदद से हाइपोथायरायडिज्म का उपचार आमतौर पर बहुत ही सरल, सुरक्षित और प्रभावी हो जाता है.

हाइपोथायरायडिज्म (अंडरएक्टिव थायराइड)

लक्षण

हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण हार्मोन्स की कमी की के आधार पर भिन्न – भिन्न होते हैं. लेकिन आम तौर पर, कई समस्याएं अक्सर धीरे-धीरे सालों में विकसित होती हैं.

सबसे पहले तो आप शायद अक्सर थकान का होना और वजन बढ़ने जैसे हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों को देख सकते हैं, या फिर आप उन्हें बढ़ती उम्र का नाम देकर अनदेखा कर सकते हैं. लेकिन जैसे – जैसे आपकी चयापचय प्रणाली धीमी होती है, आपको अधिक स्पष्ट संकेत और लक्षण दिखाई पड़ने लगेंगे. हाइपोथायरायडिज्म के संकेत और लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:

  • थकान
  • ठंड के प्रति संवेदनशीलता में वृद्धि
  • कब्ज
  • रूखी त्वचा
  • वजन का बढ़ना
  • सूजा हुआ चेहरा
  • आवाज़ का बैठ जाना
  • मांसपेशियों में कमज़ोरी
  • रक्त में कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर
  • मांसपेशियों में दर्द, बहुत कोमलता या कठोरता
  • जोड़ों में दर्द, कठोरता या सूजन
  • सामान्य मासिक धर्म की तुलना में अनियमित/प्रबल मासिक धर्म का होना
  • बालो का झड़ना
  • दिल की धड़कन का धीमा होना
  • डिप्रेशन
  • स्मृति का कमज़ोर पड़ना

जब हाइपोथायरायडिज्म का इलाज नहीं किया जाता है, तो इसके संकेत और लक्षण धीरे-धीरे अधिक गंभीर हो सकते हैं. आपकी थायराइड ग्रंथि को अधिक हार्मोन जारी करने के लिए निरंतर मिलते रहने वाली उत्तेजना से थायराइड (घेंघा) बड़ी हो सकती है. इसके अलावा, आप बहुत ही भुलक्कड़ बन जाते हैं, आपके दिमाग के कार्य करने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है, या फिर आप उदास महसूस कर सकते हैं.

हाइपोथायरायडिज्म का विकसित रूप, जिसे मिक्सडीमा के नाम से जाना जाता है, बहुत ही दुर्लभ बीमारी है, लेकिन अगर यह बीमारी किसी को होती है तो वह जानलेवा हो सकती है. उसके लक्षणों में कम रक्तचाप, सांस की कमी, शरीर के तापमान में कमी, प्रतिक्रिया का अभाव और यहां तक कि कोमा भी शामिल हैं. बहुत ही गंभीर मामलों में मिक्सडीमा घातक हो सकती है.

शिशुओं में हाइपोथायरायडिज्म

हाइपोथायरायडिज्म (अंडरएक्टिव थायराइड)

यद्यपि हाइपोथायरायडिज्म अक्सर मध्यम आयु वर्ग के लोगों को और वृद्ध महिलाओं को प्रभावित करता है, लेकिन कोई भी इस बीमारी की चपेट में आ सकता है, यहाँ तक कि दूध पीता शिशु भी. शुरुआत में, ऐसे बच्चे जो थायराइड ग्रंथि के बिना पैदा हुए हैं या फिर जिनकी ग्रंथि ठीक से काम नहीं कर रही होती है, उनमें कुछ संकेत और लक्षण दिखाई पड़ सकते हैं. जब नवजात बच्चे हाइपोथायरायडिज्म की समस्या से प्रभावित होते हैं, तो उनमे निम्न संकेत शामिल हो सकते हैं:

  • त्वचा का पीला और आंखों के सफेद हिस्से का (पीलिया) पीला होना. ज्यादातर मामलों में, ऐसा तब होता है जबकि किसी बच्चे का यकृत बिलीरुबिन नामक पदार्थ का चयापचय नहीं कर पाता है, जो कि आमतौर पर तब होता है जब शरीर पुरानी या क्षतिग्रस्त लाल रक्त कोशिकाओं का पुन: उपयोग करता है.
  • अक्सर ठसा लगना
  • लम्बी, बाहर निकली हुई जीभ.
  • चेहरे का सूज जाना.
  • जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, वैसे-वैसे शिशु की परेशानी बढती है. वह शिशु सामान्य रूप से विकसित होने में असफल हो सकता है. संकेतों में निम्न लक्षण भी शामिल हो सकते हैं:
  • कब्ज
  • मांसपेशियों की बनाबट का मज़बूत का न होना
  • अत्यधिक नींद

जब शिशुओं में हाइपोथायरायडिज्म का इलाज नहीं किया जाता है, तो सामान्य मामलों में भी गंभीर शारीरिक और बौद्धिक विकलांगता हो सकती है.

बच्चों और किशोरों में हाइपोथायरायडिज्म

आम तौर पर, बच्चों और किशोरों में भी हाइपोथायरायडिज्म की समस्या होने पर वही लक्षण होते हैं जो वयस्कों में पाए जाते हैं, वे निम्न लक्षणों का भी अनुभव कर सकते हैं:

  • वृद्धि का अच्छा न होना, जिसके परिणामस्वरूप लम्बाई में कमी का होना
  • स्थायी दांतों का विकास देरी से होना
  • विलंबित युवावस्था
  • मानसिक विकास में कमी

डॉक्टर की मदद कब ली जाए

यदि आप बिना किसी कारण के थका हुआ महसूस कर रहे हैं या हाइपोथायरायडिज्म के अन्य लक्षणों को देख पा रहे हैं, जैसे सूखी पीली त्वचा, सूजा हुआ चेहरा, कब्ज या फिर कर्कश आवाज, तो ऐसे में अपने डॉक्टर को दिखाएँ.

यदि आपकी पहले कभी थायरॉइड सर्जरी हुई है, रेडियोधर्मी आयोडीन या एंटी-थायराइड दवाओं से उपचार हुआ है; या रेडिएशन थेरेपी आपके सिर, गर्दन या ऊपरी छाती पर हुई है तो आपको अपने थायरॉइड फ़ंक्शन के परीक्षण के लिए डॉक्टर को समय-समय पर दिखाना होगा. हालांकि, इनमें से किसी भी उपचार या प्रक्रियाओं से हाइपोथायरायडिज्म के विकसित होने में कई वर्ष या कई दशक भी लग सकते हैं.

यदि आपके रक्त में कोलेस्ट्रॉल की उच्च मात्रा है, तो अपने डॉक्टर से बात करें कि क्या हाइपोथायरायडिज्म इसका कारण हो सकता है. और यदि आप हाइपोथायरायडिज्म के लिए हार्मोन थेरेपी की मदद ले रहे हैं, तो जितनी बार आपका डॉक्टर आपको मिलने की सलाह दे उतनी बार ध्यान से मिलें. प्रारंभ में, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि आपको दवा की सही खुराक मिल रही है. और समय के साथ, आपकी खुराक बदल सकती है.

कारण

जब आपकी थायराइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन्स का उत्पादन नहीं करती है, तो आपके शरीर में रासायनिक प्रक्रियाओं का संतुलन गड़बड़ हो सकता है. इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे ऑटोअम्यून बीमारी, हाइपरथायरायडिज्म का इलाज़, रेडिएशन थेरेपी, थायराइड सर्जरी और कुछ ख़ास दवायें.

थायरॉइड ग्रंथि छोटी, तितली के आकार में होती है जो आपके गर्दन में सामने की तरफ़ आधार में स्थित होती है, आपके गले के कौवे के ठीक नीचे. थायराइड ग्रंथि द्वारा उत्पादित हार्मोन – ट्रायोडोडायथायोनिन (टी ३) और थायरोक्साइन (टी ४) – ये चयापचय के सभी पहलुओं को प्रभावित करते हुए आपके समग्र स्वास्थ्य पर एक गहरा प्रभाव डालते हैं. ये आपके शरीर में वसा और कार्बोहाइड्रेट की दर को नियंत्रित रखते हैं, आपके शरीर के तापमान और प्रोटीन के उत्पादन को नियंत्रित करने में मदद करते हैं, आपकी हृदय गति को प्रभावित करते हैं.

हाइपोथायरायडिज्म की समस्या तब आती है जब थायराइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन का उत्पादन करने में विफल हो जाती है. हाइपोथायरायडिज्म कई कारणों की वजह से हो सकती है, जिनमें शामिल हैं:

  • ऑटोअम्यून बीमारी. वे लोग जो एक विशेष सूजन संबंधी विकार से पीड़ित होते हैं जिसे हाशिमोतो थायराइडिसिस कहा जाता है, वह हाइपोथायरायडिज्म का सबसे आम कारण होता है. ऑटोअम्यून विकार तब होता है जब आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली एंटीबॉडीज उत्पन्न करती है जो आपके स्वयं के ऊतकों पर हमला करती है. कभी-कभी इस प्रक्रिया में आपकी थायराइड ग्रंथि शामिल होती है. वैज्ञानिक अभी भी इस बात के निष्कर्ष पर नहीं पहुच पाए हैं कि शरीर अपने खिलाफ ही एंटीबॉडीज क्यों पैदा करता है. कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि किसी वायरस या बैक्टीरिया से जुडी प्रतिक्रिया से इसकी शुरुआत होती है, जबकि कुछ अन्य लोग मानते हैं कि इसके लिए आनुवांशिक दोष गुनहगार हो सकते हैं. एक बात तो सुनिश्चित है कि ऑटोअम्यून बीमारी एक से अधिक कारणों के चलते होती है. कैसा भी हो लेकिन ये एंटीबॉडीज हार्मोन का उत्पादन करने की थायराइड की क्षमता को प्रभावित करते हैं.
  • हाइपरथायरायडिज्म का उपचार. वे लोग जो बहुत अधिक थायरॉइड हार्मोन (हाइपरथायरायडिज्म) का उत्पादन करते हैं, अक्सर उनका इलाज़ रेडियोधर्मी आयोडाइन या एंटी-थायराइड दवाओं से किया जाता है जिससे उत्पाद को कम और सामान्य किया जा सके. हालांकि, कुछ मामलों में, हाइपरथायरायडिज्म के उपचार के परिणामस्वरूप स्थायी हाइपोथायरायडिज्म हो सकता है.
  • थायराइड सर्जरी. थायराइड ग्रंथि को पूर्ण रूप से या इसके बड़े हिस्से को हटाने से हार्मोन उत्पादन कम हो सकता है या रुक सकता है. उस स्थिति में, आपको जीवनभर थायराइड हार्मोन को कृत्रिम रूप से लेते रहना होगा.
  • रेडिएशन उपचार. सिर और गर्दन के कैंसर के इलाज के लिए प्रयुक्त विकिरण आपकी थायराइड ग्रंथि को प्रभावित कर सकता है और हाइपोथायरायडिज्म का कारण बन सकता है.
  • दवाएं. हाइपोथायरायडिज्म की समस्या में कई दवाएं योगदान दे सकती हैं. ऐसी ही एक दवा लिथियम है, जिसका प्रयोग ख़ास मनोवैज्ञानिक विकारों के इलाज के लिए किया जाता है. यदि आप इस दवा को ले रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से थायराइड ग्रंथि पर इसके प्रभाव के बारे में जरूर पूछें.

हाइपोथायरायडिज्म (अंडरएक्टिव थायराइड)

कभी-कभी, हाइपोथायरायडिज्म निम्न में से किसी कारण के परिणामस्वरूप भी हो सकती है:

  • जन्मजात रोग. कुछ बच्चे दोषपूर्ण थायराइड ग्रंथि या थायराइड ग्रंथि के बिना ही पैदा होते हैं. ज्यादातर मामलों में, थायराइड ग्रंथि अज्ञात कारणों के चलते सामान्य रूप से विकसित नहीं होती है, लेकिन कुछ बच्चों को यह विकार विरासत से मिलता है. अक्सर, जन्मजात हाइपोथायरायडिज्म वाले शिशु जन्म के समय सामान्य दिखाई देते हैं. यही कारण है कि अब ज्यादातर अच्छे हॉस्पिटल जन्म के समय ही नवजात शिशुओं की थायराइड स्क्रीनिंग करते हैं.
  • पिट्यूटरी विकार. हाइपोथायरायडिज्म का अपेक्षाकृत दुर्लभ कारण पिट्यूटरी ग्रंथि का पर्याप्त मात्रा में थायराइड-उत्तेजक हार्मोन (टीएसएच) को उत्पन्न करने में विफलता होता है – आमतौर पर यह पिट्यूटरी ग्रंथि के ट्यूमर के कारण होता है.
  • गर्भावस्था. कुछ महिलाएं गर्भावस्था के दौरान या बाद में हाइपोथायरायडिज्म की बीमारी से ग्रसित हो जाती हैं (पोस्टपर्टम हाइपोथायरायडिज्म), ऐसा अक्सर इसलिए होता है क्योंकि वे अपनी ही थायराइड ग्रंथि के खिलाफ़ एंटीबॉडी का उत्पादन करने लगती हैं. हाइपोथायरायडिज्म का इलाज न कराए जाने पर, गर्भपात, समय से पहले डिलीवरी और प्राक्गर्भाक्षेपक का जोखिम बढ़ जाता है. प्राक्गर्भाक्षेपक एक ऐसी स्थिति है जो गर्भावस्था के आख़िरी तीन महीनों के दौरान माँ के रक्तचाप में उल्लेखनीय वृद्धि का कारण बनती है. यह विकासशील भ्रूण को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है.
  • आयोडीन की कमी. ट्रेस खनिज आयोडीन – मुख्य रूप से समुद्री भोजन, समुद्री शैवाल, आयोडीन समृद्ध मिट्टी और आयोडीनयुक्त नमक में उगाए जाने वाले पौधों में पाया जाता है – यह थायराइड हार्मोन के उत्पादन के लिए आवश्यक होता है. दुनिया के कुछ हिस्सों में, आयोडीन की कमी बहुत ही सामान्य है, लेकिन भारत में आयोडीन को नमक में मिला देने से यह समस्या लगभग समाप्त हो गयी है. इसके विपरीत, बहुत ज्यादा आयोडीन लेने से हाइपोथायरायडिज्म भी हो सकती है.

जोखिम

यद्यपि कोई भी व्यक्ति हाइपोथायरायडिज्म का शिकार हो सकता है, लेकिन आपको अधिक ख़तरा है यदि:

  • ६० वर्ष से अधिक उम्र की महिला हैं
  • ऑटोअम्यून रोग से पीड़ित हैं
  • परिवार में थायराइड रोग पहले से है
  • अन्य ऑटोअम्यून बीमारियां, जैसे रुमेटी या चर्मक्षय, पुरानी सूजन की समस्या
  • रेडियोधर्मी आयोडाइन या एंटी-थायराइड दवाओं से इलाज का होना
  • गर्दन या ऊपरी छाती में विकिरण सम्बंधित इलाज़ का करवाया जाना
  • थायराइड सर्जरी (आंशिक थायरोइडक्टोमी)
  • पिछले छह महीनों में बच्चे को जन्म देना या वर्तमान समय में गर्भवती होना

जटिलतायें

हाइपोथायरायडिज्म का इलाज़ न कराया गया हो तो उससे कई स्वास्थ्य समस्यायें पैदा हो सकती हैं:

  • घेंघा. आपकी थायराइड ग्रंथि को अधिक हार्मोन जारी करने के लिए निरंतर मिलते रहने वाली उत्तेजना से थायराइड बड़ी हो सकती है, इसे घेंघा के नाम से जाना जाता है. हाशिमोतो थायराइडिसिस घेंघा के सबसे आम कारणों में से एक है. हालांकि आम तौर पर असुविधाजनक न होने पर भी घेंघा आपकी सुन्दरता को प्रभावित कर सकता है और भोजन को निगलने या सांस लेने में हस्तक्षेप कर सकता है.
  • हृदय की समस्याएं. हाइपोथायरायडिज्म से हृदय रोग का जोखिम भी बढ़ जाता है, मुख्य रूप से कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (एलडीएल) कोलेस्ट्रॉल के उच्च स्तर के कारण – “खराब” कोलेस्ट्रॉल – यह अंडरएक्टिव थायराइड से प्रभावित लोगों में हो सकता है. यहां तक कि सबक्लिनिकल हाइपोथायरायडिज्म, या फिर हाइपोथायरायडिज्म का हल्का या प्रारंभिक रूप भी जिसमें लक्षण अभी तक सही से विकसित भी नहीं हुए हैं, वह भी कोलेस्ट्रॉल के स्तर में वृद्धि कर सकता है और आपके दिल की पंपिंग क्षमता को खराब कर सकता है. हाइपोथायरायडिज्म से दिल के आकार में वृद्धि हो सकती है और यह दिल के विफल होने का कारण भी बन सकता है.
  • मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे. हाइपोथायरायडिज्म में अवसाद हो सकता है और यह अवसाद समय के साथ और अधिक गंभीर हो सकता है. हाइपोथायरायडिज्म से मानसिक कार्यप्रणाली धीमी पड़ सकती है.
  • पेरिफेरल न्यूरोपैथी. दीर्घकालिक अनियंत्रित हाइपोथायरायडिज्म आपकी पेरिफेरल नसों को नुकसान पहुंचा सकता है – वे तंत्रिकाएं जो आपके मस्तिष्क से और रीढ़ की हड्डी से होते हुए आपके शरीर के बाकी हिस्सों में जानकारी ले जाती हैं, उदाहरण के लिए, आपकी बाहें और पैर. पेरिफेरल न्यूरोपैथी के लक्षणों में तंत्रिका क्षति से प्रभावित क्षेत्र में दर्द, सूजन और झुकाव शामिल हो सकता है. यह मांसपेशियों को कमजोर या मांसपेशी नियंत्रण के नुकसान का कारण बन सकता है.
  • मिक्सडीमा. यह दुर्लभ, जीवन को जोख़िम में डालने वाली बीमारी दीर्घकालिक, अनियंत्रित हाइपोथायरायडिज्म के चलते होती है. इसके लक्षणों में ठंड का तीव्र अहसास, नींद का आना और उसके बाद में कमज़ोरी और बेहोशी का होना होता है. मिक्सडीमा कोमा सीडेटिव, संक्रमण या अन्य तनाव से हो सकता है. यदि आप मिक्सडीमा के लक्षण से परेशान हैं, तो आपको तत्काल आपातकालीन चिकित्सा की आवश्यकता है.
  • बांझपन. थायराइड हार्मोन के निम्न स्तर से डिंबोत्सर्जन की प्रक्रिया में हस्तक्षेप होता है, जो प्रजनन क्षमता को कम करता है. इसके अलावा, हाइपोथायरायडिज्म के कुछ कारण – जैसे ऑटोअम्यून डिसऑर्डर – प्रजनन क्षमता को भी खराब कर सकते हैं.
  • जन्म दोष. ऐसी महिलाएं जिनका थायराइड का इलाज़ नहीं करवाया गया है उनके बच्चे स्वस्थ माँओं की तुलना में जन्म दोषों से अधिक प्रभावित होने के जोखिम पर होते हैं. ये बच्चे गंभीर रूप से बौद्धिक और शारीरिक समस्याओं से भी प्रभावित हो सकते हैं. ऐसे बच्चे जिन्हें जन्म के समय मौजूद हाइपोथायरायडिज्म का इलाज़ नहीं मिल पाता है उन्हें शारीरिक और मानसिक, दोनों ही स्तरों पर विकास में गंभीर समस्याओं का खतरा होता है. लेकिन अगर इस स्थिति को जीवन के शुरूआती महीनों में पकड़ लिया जाये तो सामान्य विकास की उत्कृष्ट संभावनाएं मौज़ूद होती हैं.
हाइपोथायरायडिज्म (अंडरएक्टिव थायराइड)
Rate this post

संबंधित पोस्ट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *