ग्रीन कॉफी फली: क्या इस वजन घटाने के सप्लिमेंट के फायदे इसके जोखिम से ज़्यादा हैं?

By | March 21, 2018
ग्रीन कॉफी फली: क्या इस वजन घटाने के सप्लिमेंट के फायदे इसके जोखिम से ज़्यादा हैं?

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Physical Health And Behavioural Sciences

green coffee

हो सकता है आप कॉफी पीने को अपनी “बुरी आदत” मानते हों लेकिन आप माने या न मानें, कई शोध दर्शा चुके हैं कि कॉफी पीने वाले लोगों को कई गंभीर बीमारियों का खतरा कॉफी न पीने वालों की तुलना में कम होता है। यह बात सामान्य कॉफी, मशरूम कॉफी या फिर ग्रीन कॉफी फली, सब पर लागू है। कॉफी पोषण में पाया जाने वाला कैफ़ीन हमेशा बदनाम रहा है लेकिन शोध दर्शाते हैं कि कैफ़ीन के बारे में प्रचलित कई बातें अर्धसत्य हैं। कैफ़ीन की ली जाने वाली मात्रा के आधार पर इसके लाभप्रद और हानिकारक, दोनों तरह के प्रभाव हो सकते हैं। कैफ़ीन वाले “उत्प्रेरक” या स्टिमुलेंट प्रोडक्ट्स से कुछ खनिजों के अवशोषण पर प्रभाव पड़ता है जैसे, मैग्नीशियम, मैंगनीज़ और पोटेशियम एवं एंटीऑक्सीडेंट पदार्थ। अधिकतर व्यावसायिक कॉफियों को बनाने के लिए कॉफी की फलियों को बहुत भूना जाता है जिससे इसके एंटीऑक्सीडेंट बहुत कम हो जाते है। यदि आप दिन में एक या दो कप कॉफी पीते हैं तो कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन इससे ज़्यादा लेने पर आपको एसिडिटी या एड्रेनल ग्रंथियों को नुक्सान पहुँचने का खतरा बढ़ जाता है

ग्रीन कॉफी फली: क्या इस वजन घटाने के सप्लिमेंट के फायदे इसके जोखिम से ज़्यादा हैं?एक सावधानी रखें, Green Coffee को आधिकारिक वेबसाइट से ही ख़रीदें क्योंकि हम जैसे आम लोगों को ठगने के लिए इंटरनेट पर मौजूद धोखेबाज़ों की संख्या बहुत ज़्यादा है. 

ग्रीन कॉफी फली: क्या इस वजन घटाने के सप्लिमेंट के फायदे इसके जोखिम से ज़्यादा हैं?

वहीं दूसरी ओर, कैफ़ीन हर किसी को सूट नहीं भी करता और कभी-कभी इससे परहेज करनी होती है। इस तथ्य के अधिकाधिक प्रमाण मिल रहे हैं कि कॉफी एवं कैफ़ीन वाली अन्य चीजों को संयम से लेने पर – जिसमें ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट नाम का प्रोडक्ट भी शामिल है – वजन कम करने और बीमारियों की रोकथाम करने में लाभप्रद सिद्ध हो सकता है।

पिछले कुछ सालों में ग्रीन कॉफी फली मार्केट में दुबले होने के एक सबसे लोकप्रिय सप्लिमेंट के रूप में उभरी है। इससे न सिर्फ लोगों की भूख कम होकर अतिरिक्त वजन कम हो जाता है, ग्रीन कॉफी को हृदय के अच्छे स्वास्थ्य, न्यूरोलॉजिकल (स्नायुतंत्र) की बीमारियों और लंबे जीवन से संबन्धित एंटी-एजिंग प्रभावों के लिए भी मददगार माना गया है।

हालांकि अभी भी इस बात पर कुछ मतभेद बना हुआ है कि ग्रीन कॉफी फली का एक्सट्रैक्ट आखिर कितना लाभप्रद है और इस बात पर भी विवाद हैं कि कुछ शोधों में शामिल शोधकर्ताओं के पक्षपात के कारण इनके निष्कर्ष भरोसेमंद नहीं माने जा सकते हैं। (1) लेकिन आज ऐसे तर्कशील प्रमाण उप्लबद्ध हैं जो दर्शाते हैं कि ग्रीन कॉफी आधुनिक जीवन की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से लड़ने में हल्के से लेकर मध्यम स्तर तक उसी तरह प्रभाव डालती है जैसे कॉफी पीने के फ़ायदे होते हैं

ग्रीन कॉफी फलियाँ क्या हैं?

green coffee

ग्रीन कॉफी एक्सट्रैक्ट आखिर है क्या और इसमें दूसरे कॉफी प्रोडक्ट्स से क्या अलग है? ग्रीन कॉफी फलियाँ, और वे सारे प्रोडक्ट्स जिन पर “ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट” लिखा हो, ऐसे प्रोडक्ट्स होते हैं जिन्हें बनाने के लिए कॉफी की फलियों को भूना नहीं जाता। हम जो कॉफी रोज़मर्रा में उबाल कर पीते हैं, उसे 475 डिग्री फ़ैरनहाइट के तापमान पर भूना गया होता है। इतने तापमान पर फलियों की रासायनिक संरचना, रंग, खुश्बू, स्वाद और पोषक तत्वों की सांद्रता बदल जाती है। उबाल कर कॉफी बनाने के बजाय प्योर ग्रीन कॉफी फली/बीज के सत्त को एक गोली के रूप में लिया जाता है। इन गोलियों को पीसी हुई ग्रीन कॉफी फलियों से बनाया जाता है और इनमें कुछ पोषक पदार्थ प्रचुर सांद्रता में होते है।

ग्रीन कॉफी कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स और लाभप्रद पदार्थों का एक समृद्ध स्त्रोत है जिसमें कई प्रकार के पॉलीफीनोल भी पाए जाते हैं। इन्हीं में से एक पॉलीफीनोल है, क्लोरोजेनिक एसिड जो ग्रीन कॉफी फलियों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। क्लोरोजेनिक एसिड से ही कॉफी के सबसे ज़्यादा फायदे परिलक्षित होते हैं और इसी पदार्थ के कारण ग्रीन कॉफी सप्लिमेंट्स को वजन कम करने और वसा-नाशकों के रूप में लाभप्रद माना जाता है। दुर्भाग्य से कॉफी की फलियों को भून देने के बाद क्लोरजेनिक एसिड का एक बड़ा हिस्सा नष्ट हो जाता है और यही कारण है कि प्योर/बिना भूनी हुई फलियों का सेवन कई नजरियों से ज़्यादा स्वास्थ्यप्रद माना जाता है।

2008 में जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में प्रकाशित एक शोध में पाया गया था कि ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट में तीन प्रकार के क्लोरोजेनिक और कैफ़िओइलक्विनिक एसिड (सीजीए), डाईकैफ़ियोलक्विनिक एसिड और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जिनमें कैफीक, फेरुलिक, आइसोफेरुलिक और पी-कूमैरिक ऐड शामिल हैं। 10 स्वस्थ वयस्कों को 170 ग्राम ग्रीन कॉफी एक्सट्रैक्ट देने के बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि इसे लेने के आधे घंटे से लेकर आठ घंटे तक शरीर में इन लाभप्रद पदार्थों का स्तर सबसे ज़्यादा पाया गया था। शोधकर्ताओं का निष्कर्ष था कि – “यह शोध दर्शाता है कि ग्रीन कॉफी में पाए जाने वाले मुख्य सीजीए कंपाउंड मानव शरीर में अच्छे से अवशोषित होकर मैटाबोलाइज़ हो जाते हैं।“ (2)

कुछ शोधों ने यह भी पाया है  कि ग्रीन कॉफी एक्सट्रैक्ट में लगभग 46 प्रतिशत क्लोरोजेनिक एसिड और हाईड्रोक्सीसिनामिक एसिड पाए जाते हैं जिनके एंटीऑक्सीडेंट स्वास्थ्य लाभ होते हैं। क्लोरोजेनिक एसिड और अन्य हाईड्रोक्सीसिनामिक एसिड्स की संयुक्त सांद्रता लगभग 57 प्रतिशत होती है। अधिकतर मानक ग्रीन कॉफी एक्सट्रैक्ट उत्पादों में कैफ़ीन का स्तर 2 से 4 प्रतिशत तक पाया जाता है।

ग्रीन कॉफी बीन में कैफ़ीन की मात्रा

beans

ग्रीन कॉफी बी एक्सट्रैक्ट में कितना कैफ़ीन होता है?

एक कप (आठ आउंस) मानक उबाली हुई कॉफी में लगभग 95 मिलीग्राम कैफ़ीन होता है। आम कॉफी के एक कप की तुलना में ग्रीन कॉफी में भी इतना ही कैफ़ीन हो सकता है लेकिन यह इस पर निर्भर करता है कि आप कितना डोज़ ले रहे हैं, अर्थात, – आप एक साथ कितनी और दिन में कितने बार कैप्सूल लेते हैं।

ग्रीन कॉफी  फलियों में पाई जाने वाली कैफ़ीन मात्रा हर ब्रांड में अलग-अलग हो सकती है और प्रति कैप्सूल 20-50 मिलीग्राम तक हो सकती है। इसका डोज़ भी अलग-अलग हो सकता है और एक दिन में एक बार में दो कैप्सूल से लेकर दिन में तीन बार तीन कैप्सूल तक हो सकता है। (3) अर्थात, यदि आप ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट प्रोडक्ट्स को सलाह अनुसार लेंगे तो आप रोज लगभग 100-450 मिलीग्राम कैफ़ीन का सेवन करेंगे। यह सामान्य कॉफी के एक से पाँच कप कप के बराबर होता है।

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ग्रीन कॉफी फली: क्या इस वजन घटाने के सप्लिमेंट के फायदे इसके जोखिम से ज़्यादा हैं?

कॉफी में पाए जाने वाले कैफ़ीन के कारण इससे मुस्तैदी और ऊर्जा आती है और इसलिए इससे शरीर में कुछ तरह के हॉरमोन एवं न्यूरोट्रंस्मिटर स्त्रावित होने लगते हैं। ऐसे में क्या ग्रीन कॉफी एक्सट्रैक्ट को भी एक “उत्प्रेरक” या स्टिमुलेंट ही माना जाए? हमारे ख्याल से तो, हाँ। कैफ़ीन तकनीकी रूप से एक दवाई ही है और सेंट्रल नर्वस सिस्टम के क्रियाकलापों पर प्रभाव डालने की दृष्टि से देखा जाए तो यह उत्प्रेरक दवाओं की तरह ही काम करता है। अधितकर लोग कैफ़ीन को मेथिलेक्सआन्थीन क्लास का स्टिमुलेंट मानते हैं। मेथिलेक्सआन्थीन स्टिमुलेंट्स हमारे दिमाग और शरीर के उन महत्वपूर्ण भागों पर सीधा और कभी-कभी बड़ा असर डालते हैं जो कामेच्छा, मुस्तैदी, थकान, चिंता और नींद को नियंत्रित  करते हैं। इसके बावजूद, दुनिया में करोड़ों लोग रोजाना मेथिलेक्सआन्थीन स्टिमुलेंट्स का उपयोग करते हैं। (4)

ग्रीन कॉफी फली के 6 फायदे

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1. इससे आपको वजन या वसा कम करने में मदद मिल सकती है

ग्रीन कॉफी पहली बार लोकप्रिय तब हुई थी जब कुछ शोधों ने पाया था कि इसमें वजन कम करना शुरू कर देने की क्षमता होती है। यह स्वस्थ वजन तक पहुँचने का कोई कोई क्विक-फिक्स तरीका तो नहीं है लेकिन शोध दर्शाते हैं कि क्लोरोजेनिक एसिड शरीर में बहुत तेजी से अवशोषित होकर शरीर को ग्लूकोज एवं जमा हो चुकी चर्बी को ऊर्जा में बदलने में मदद करता है। इससे दाह या सूजन भी कम हो सकता है (जो मधुमेह और अन्य मैटाबॉलिक समस्याओं का मूल कारण होता है), रक्त में शुगर रिलीज होने की गति को धीमा कर सकता है और इंसुलिन के रिलीज़ को नियंत्रित कर सकता है जिससे कोशिकाओं में ग्लूकोज आता है।

एशियन पैसिफिक जर्नल ऑफ ट्रोपिकल मेडिसिन में प्रकाशित जानवरों पर किए एक शोध  में ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट (गीसीबीई) का मोटे चूहों पर परीक्षण किया गया था। इस शोध में पाया गया था कि गीसीबीई ने “अर्थपूर्ण तरीके से शारीरिक वजन बढ़ना, लिवर के वजन और पेट में जमा सफ़ेद उत्तकों की मात्रा में कमी कर दी थी और पेट के उत्तक लिपोलिसिस हॉरमोन जैसे एडीपोनेक्टिन तथा लेप्टिन को नियंत्रित किया था।“ शोध खत्म होने पर पाया गया कि जिन चूहों को जीसीबीई दिया गया था, उनमें वसा की मात्रा उन चूहों की तुलना में कम हो गई थी जिन्होने एक जैसी वसा वाला खाना खाया था लेकिन जिन्हें जीसीबीई नहीं दिया गया था। कुल मिलाकर यह पाया गया कि ग्रीन कॉफी बीन खाने वाले चूहों में तुलनात्मक रूप से वजन और वसा की मात्रा में काफी कमी पाई गई जिसके परिणामस्वरूप शोधकर्ताओं ने कहा कि “गीसीबीई के संभावित मोटापा-नाशक प्रभाव होते हैं।“ (5)

2. इससे रक्त में शुगर सामान्य हो सकती है

वैज्ञानिक कहते हैं कि रक्त-शर्करा पर ग्रीन कॉफी फली का सकारात्मक असर इस कारण होता है क्योंकि इसमें दाह कम करने के गुण होते हैं। इससे शरीर को स्वस्थ वजन हासिल करने में मदद मिलती है और दाहकारी भोजनों को खाने की इच्छा में भी कमी आती है। यह रक्त के ग्लूकोज स्तर को घटा कर ऊर्जा स्तर को भी बढ़ा देती है। कैफ़ीन का मैटाबॉलिक प्रक्रियाओं पर सकारात्मक असर तो होता ही है, ग्रीन कॉफी से बने डीकैफ़ीनेटेड प्रोडक्ट्स (जिनसे कैफ़ीन निकाल लिया गया हो) भी लाभप्रद पाए गए हैं।(6)

ग्रीन कॉफी से रक्त में शर्करा का स्तर भी सामान्य हो सकता है और कई बार यह असर काफी ज़्यादा पाया गया है। इससे टाइप 2 मधुमेह का जोखिम काफी कम हो जाता है। एविडेंस-बेस्ड कोम्प्लीमेंट्री एंड आल्टरनेटिव मैडिसिन में प्रकाशित एक शोध ने ऐसे प्रमाण पाए कि “डीकैफ़ीनेटेड ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट से [अधिक-वसा के खान-पान]- के कारण जमा हुई वसा और इंसुलिन प्रतिरोध में कमी आती है क्योंकि ये एडिपोजेनेसिस में शामिल जींस और विसरल एडिपोस उत्तकों में दाह को को डाउनरेगुलेट करती है।“ (7)

3. यह रक्तचाप कम कर सकती है

कई शोधों ने दर्शाया है कि ग्रीन कॉफी एक्सट्रैक्ट से रक्तचाप कम हो सकता है। 17 हाइपोग्लाइसीमिक मरीजों पर किए गए एक शोध में पाया गया कि ग्रीन कॉफी फलियों के एक्सट्रैक्ट को लेने पर 17 में से 13 छात्रों ने रक्तचाप स्तर में कमी पाई। प्रतिभागियों ने रोज लगभग 800 ग्राम मिलीग्राम एक्सट्रैक्ट लिया। इतना डोज़ थोड़ा ज़्यादा माना जाता है लेकिन इसे रक्तचाप को कम करने के लिए प्रभावशील माना जाता है। अन्य शोधों ने दर्शाया है कि 150-140 मिलीग्राम के बीच के कम डोज़ को भी 12 हफ्तों तक लेने से व्यस्कों में रक्तचाप कम हो जाता है। (8)

ऐसे भी प्रमाण हैं कि क्लोरोजेनिक एसिड में हाइपो-ग्लाइसीमिक एजेंट होते हैं जो लिपिड मैटाबॉलिज़्म पर सकारात्मक असर डालते हैं जिससे रक्त में कॉलेस्ट्रोल और ट्राईगलीसिराइड की मात्रा कम होती है। जर्नल ऑफ न्यूट्रिशनल बायोकेमिस्ट्री में प्रकाशित एक शोध में चूहों को तीन हफ्ते तक ग्रीन कॉफी एक्सट्रैक्ट दे कर उनकी फास्टिंग प्लाज़्मा ग्लूकोज़, प्लाज़्मा और लिवर ट्राईएसिलग्लिसेरोल पर क्लोरोजेनिक एसिड के प्रभाव का अध्ययन किया गया। ऐसा पाया गया कि एक्सट्रैक्ट से कई जगह फायदा हुआ। प्रकाशित हुई रिपोर्ट “फस्टिंग प्लाज़्मा कॉलेस्ट्रोल एंड ट्राईएसिलग्लिसेरोल की सांद्रता में क्रमश: 44% और 58% की और लिवर ट्राईएसिलग्लिसेरोल में (24%) की कमी आ गई थी।“

4. इसके एंटी-एजिंग असर इसके एंटीऑक्सीडेंट्स के कारण हैं

जिन शोधों में ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट का आकलन किया गया था वहाँ ऐसे कई एंटीऑक्सीडेंट गुणों की पहचान की गई थी जिनसे बुढ़ापे के लक्षण धीमे हो गए थे। जैसा ऊपर बताया गया है, क्लोरोजेनिक एसिड को ही ग्रीन कॉफी फली के अधिकतर एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए उत्तरदायी माना जाता है। हालांकि एंटीओक्सीडेंट्स का कोई डोज़ निर्धारित नहीं है लेकिन कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि कोई व्यक्ति रोज 400 मिलीग्राम ग्रीन कॉफी सप्लिमेंट (दो या तीन डोज़ करके) लेता है तो उसे अपने खान-पान से मिलने वाले एंटीओक्सीडेंट्स के एक बड़े हिस्से की आपूर्ति हो जाती है।

5. इससे ऊर्जा स्तर बढ़ाने में मदद मिल सकती है

यह ज्ञात है कि कॉफी से लोगों की थकान कम होती है और ऊर्जा स्तर बढ़ जाता है क्योंकि इसमें कैफ़ीन स्टिमुलेंट पाया जाता है। कैफ़ीन असल में एक दवाई ही है जो दुनिया भर में सबसे ज़्यादा लिया जाने वाला साइकोएक्टिव पदार्थ है।

अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोशियन के अनुसार, कैफ़ीन के “साइकोमोटर और संज्ञानात्मक प्रदर्शन, मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य, रक्तचाप, और डायग्नोस्टिक एवं चिकिसकीय अनुप्रयोगों एवं खेल में प्रदर्शन” पर अर्थपूर्ण असर होते हैं। (10) जब आप कैफ़ीन वाला कोई पेय पीते हैं या कैफ़ीन को ग्रीन कॉफी बीन जैसे किसी स्टिमुलेटिंग सप्लिमेंट/प्रोडक्ट से पाते हैं तो कैफ़ीन रक्त में अवशोषित हो जाता है और वहाँ से दिमाग में जाकर एडेनोसिन नामक एक इनहीबिटरी न्यूरोट्रंस्मिटर को रोक देता है। (11) साथ ही, नोरपिनएफ्रीन नामक न्यूरोट्रांसमिटर और डोपामीन के स्तर बढ़ जाते हैं जिससे संज्ञान में बदलाव आता है और साथ ही एकाग्रता, प्रेरणा और सकारात्मक नजरिए पर भी अच्छा असर होता है।

6. इससे आपकी एकाग्रता बढ़ सकती है और मूड अच्छा हो सकता है

जैसा ऊपर बताया गया है, ग्रीन कॉफी प्रोडक्ट्स में अच्छी मात्रा में कैफ़ीन पाया जाता है और इसे बड़ी खुराक में लेने से आपको ज़्यादा मात्रा में कैफ़ीन मिलता है। कई शोधों में पाया गया है कि कैफ़ीन/कॉफी के उपभोग से दिमागी स्वास्थ्य और दिमाग के कार्यकलाप के कई पहलू बदले जा सकते हैं जिनसे एकाग्रता, मूड, स्मृति, मुस्तैदी/सतर्कता, प्रेरणा, परीक्षण करवाना, प्रतिक्रिया समय, मोटर नियंत्रण/शारीरिक प्रदर्शन में बलदाव आ सकता है।

यहाँ हम यह बताना चाहेंगे कि यह जरूरी नहीं है कि कैफ़ीन से हर व्यक्ति के संज्ञान क्रियाकलाप पर सकारात्मक असर ही पड़े, इसलिए अपने खुद के लक्षणों की निगरानी करें और शुरुआत में डोज़ कम ही रखें। इस बात का ध्यान रखें कि ग्रीन कॉफी बीन सप्लिमेंट्स लेने की अति न करें जिससे आपको कैफ़ीन ओवेरडोज़ न हो।

ग्रीन कॉफी फली: क्या इस वजन घटाने के सप्लिमेंट के फायदे इसके जोखिम से ज़्यादा हैं?एक सावधानी रखें, Green Coffee को आधिकारिक वेबसाइट से ही ख़रीदें क्योंकि हम जैसे आम लोगों को ठगने के लिए इंटरनेट पर मौजूद धोखेबाज़ों की संख्या बहुत ज़्यादा है. 

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ग्रीन कॉफी फलियों को कैसे उपयोग करें

ग्रीन कॉफी सीड एक्सट्रैक्ट प्रोडक्ट में इन चीजों का ध्यान रखें:

  •  सुनिश्चित कर लें कि आप सिर्फ उन ब्राण्डों को चुनें जिनमें प्योर कॉफी सीड  एक्सट्रैक्ट का उपयोग किया गया और इसमें ऐडिटिव, बाइंडर, फिलर या सेल्यूलोस न मिलाए गए हों। सबसे बेहतर होता है ऑर्गैनिक प्रोडक्ट्स लेना क्योंकि इससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि फलियों को बिना खास रसायनों के उपयोग के उगाया गया था।
  • आपको अमेज़ोन या लोकल हैल्थ-फूड स्टोर पर प्योर एक्सट्रैक्ट मिल जाएगा।
  • यदि आपको कैफ़ीन से संवेदनशीलता रही हो या आपको हृदय संबंधी बीमारियाँ हों (इसके बारे में और नीचे बताया गया है), तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह ले लें।

आपको ग्रीन कॉफी कितनी मात्रा में लेना चाहिए? यह कई चीजों पर निर्भर करता है जैसे आपकी वर्तमान स्थिति, कैफ़ीन से रिएक्शन और शरीर का वजन। कई ब्रांड यह सलाह देते हैं कि आप अंदाज़न दिन में दो बार 800 मिलीग्राम (खाने के 30 मिनट पहले) लेकर शुरू करें। इस समय ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट का कोई “उचित डोज़” निर्धारित नहीं किया गया है। शोधों में पाया गया है कि 200-400 मिलिग्राम के कम डोज़ लेने पर भी फायदा होता है लेकिन 800-3000 ग्राम तक बढ़ा देने पर इसका असर काफी बढ़ जाता है। देखिए, अंत में डोज़ आपके सप्लिमेंट में क्लोरोजेनिक एसिड की सांद्रता पर निर्भर करेगा; क्लोरोजेनिक एसिड की मात्रा जितनी अधिक होगी, आपको उतनी ही कम मात्रा लेनी होगी। इसके डोज़ निम्नलिखित मात्राओं में लेने की सलाह दी जाती है:

  • यदि क्लोरोजेनिक एसिड की सांद्रता कम (लगभग 10 प्रतिशत) हो, तो रोज 800 – 3,000 मिलीग्राम लें।
  • यदि क्लोरोजेनिक एसिड की सांद्रता ज़्यादा (लगभग 20 प्रतिशत) हो, तो रोज करीब 600 -1,500 मिलीग्राम लें।
  • यदि क्लोरोजेनिक एसिड की सांद्रता 50 प्रतिशत तक हो तो अपने डोज़ को रोज करीब 200 – 600 मिलीग्राम तक कम कर लें।
  • डोज़ के बारे में निर्देशों को ध्यान से पढ़ें और अपने डॉक्टर से सलाह लिए बिना 2,000 – 3,000 मिलीग्राम से ज़्यादा न लें।

ग्रीन कॉफी बीन के संभावित साइड-इफेक्ट

हालांकि ग्रीन कॉफी बीन के प्रमाणित लाभ जरूर हैं, लेकिन यह कोई जादूगरी नहीं है। यह आपको वजन कम करके अपने स्वास्थ्य के अन्य पहलुओं को बेहतर करने का एक जरिया मात्र है। ध्यान रखें कि सप्लिमेंट्स से फायदा तो हो सकता है लेकिन आप अपनी डाइट में बदलाव करके, तनाव कम करके, पर्याप्त नींद लेकर और नियमित रूप से व्यायाम करके भी अच्छे परिणाम पा सकती हैं।

कुछ लोगों को किसी भी तरह के कैफ़ीन वाले पेय, जिसमें कॉफी भी शामिल है, पीने से साइड-इफेक्ट हो सकते हैं जिसमें चिंता और रक्तचाप संबंधी समस्याएँ शामिल हैं। जिन लोगों को कैफ़ीन से संवेदनशीलता है या हृदय संबंधी समस्याएँ हैं, उन लोगों को कैफ़ीन वाले पेय या सप्लिमेंट नहीं लेने चाहिए क्योंकि इससे हृदय के धड़कने संबंधी विकार और बिगड़ सकते हैं। यदि कैफ़ीन या ग्रीन कॉफी फलियों वाले प्रोडक्ट्स लेने पर आपको आईबीएस, कब्ज, उल्टी-दस्त, सरदर्द, नींद में समस्या या एसिडीटी जैसी समस्याओं के लक्षण उभरने लगें तो इनका उपयोग बंद कर दें और अपने डॉक्टर से सलाह लें।

जिन लोगों को निम्नलिखित समस्याएँ हों, उन्हें कैफ़ीन वाले प्रोडक्ट्स लेने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे कोई अवांछित जोखिम न उठा रहे हों:

  • गर्भावस्था में या दूध पिलाते समय
  • एनज़ाइटी डिसोर्डर
  • ब्लीडिंग डिसोर्डर
  • मधुमेह
  • ग्लूकोमा
  • उच्च रक्तचाप
  • ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट सप्लिमेंट को कच्ची “प्योर” कॉफी बीन्स से बनाया    जाता है जिसमें क्लोरोजेनिक एसिड नाम का प्रोटेक्टिव पॉलीफीनोल समृद्ध मात्रा में पाया जाता है।
  • ग्रीन कॉफी बीन के उपभोग के कुछ फ़ायदों में वजन या वसा में कमी, रक्त में शर्करा  और इंसुलिन की मात्रा पर नियंत्रण, हृदय स्वास्थ्य, अधिक ऊर्जा, संज्ञानात्मक स्वस्थ्य और बेहतर मूड शामिल हैं।
  • जिन लोगों पर कैफ़ीन का असर आसानी से हो जाता हो या जिन्हें कोई खास विकार हों, उन्हें ज़्यादा मात्रा में ग्रीन कॉफी बीन लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए क्योंकि कैफ़ीन के हानिकारक प्रभाव हो सकते हैं।

भारत में ग्रीन कॉफी का मूल्य

भारत में ग्रीन कॉफी का मूल्य कई कारकों के आधार पर भिन्न होता है।

भारत में ग्रीन कॉफी के मूल्य के लिए पहला कारक ये बात है कि आप ब्रांडेड या गैर ब्रांडेड ग्रीन कॉफी खरीद रहे हैं। कोई भी ब्रांड वाली ग्रीन कॉफी भारत में गैर-ब्रांडेड की तुलना में अधिक महँगी होगी लेकिन ऐसे कम से कम आप जो उत्पाद खरीद रहे हैं उसकी गुणवत्ता के बारे में सुनिश्चित हो सकते हैं।

एक अन्य कारक जिस पर ग्रीन कॉफी मूल्य निर्भर करता है वह ग्रीन कॉफी का रूप है जिसे आप खरीदना चाहते हैं। थोक में ग्रीन कॉफी बीन्स बाजार में उपलब्ध सबसे सस्ता रूप होगा क्योंकि यह पूरी तरह से अप्रसंस्कृत होगा।

इसके बाद ग्रीन कॉफी पाउडर आता है, यानी इसमें किसी भी प्रसंस्करण के बिना बीजों से बनी पाउडर ग्रीन कॉफी होती है। सबसे महंगा ग्रीन कॉफी बीन्स सत होगा, क्योंकि इसमें बहुत सारी प्रोसेसिंग की आवश्यकता होती है। लेकिन यह बहुत ही फायदेमंद और प्रयोग में सबसे आसान होता है।

ग्रीन कॉफी की क़ीमत बाजार में उपलब्ध प्रतिस्पर्धा पर भी निर्भर करती है। चूंकि अलग-अलग ब्रांड अपने संस्करणों और ग्रीन कॉफी के रूपों के साथ आ रहे हैं इसलिए भारत में ग्रीन कॉफी की क़ीमत कम हो जाएगी

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ग्रीन कॉफी के लाभ

ग्रीन कॉफी के लाभों ने इसे प्रसिद्धि के लिए प्रेरित किया है। जब ग्रीन कॉफी भूनी जाती है तो ग्रीन कॉफी के सभी फायदे ख़त्म हो जाते हैं। ग्रीन कॉफी के कई फायदे होते हैं। ग्रीन कॉफी के फायदों के पीछे मुख्य कारण क्लोरोजेनिक एसिड है। क्लोरोजेनिक एसिड पॉलीफेनोल्स हैं और शानदार एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं।

ग्रीन कॉफी के लाभ वजन घटाना, उच्च रक्तचाप को कम करना, शरीर में मुक्त कणों के कारण होने वाली क्षति की रोकथाम आदि हैं; त्वचा के सुधार के साथ-साथ ग्रीन कॉफी के कई अन्य फायदों में रक्त शर्करा के स्तर में कमी भी है।

ग्रीन कॉफी के लाभ निम्नानुसार हैं:

  • वजन घटाने में ग्रीन कॉफी के लाभ- ग्रीन कॉफी बीन्स सत से वजन घटाने में मदद मिलती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ग्रीन कॉफी शरीर में चीनी के निस्तारण को धीमा करती है और ऐसे रक्त शर्करा को संतुलित करती है। ग्रीन कॉफी में उपलब्ध क्लोरोजेनिक एसिड यकृत के उत्पादन में भी सुधार करता है, जो बदले में वसा जलाने में मदद करता है। इस दोहरे तंत्र से शरीर में चयापचय उच्च हो जाता है और अधिक वसा अवशोषण होने लगता है।
  • शानदार एंटीऑक्सीडेंट के रूप में ग्रीन कॉफी के लाभ- जब ग्रीन कॉफी के लाभों का मूल्यांकन किया गया तो वैज्ञानिकों ने पाया कि यह एक शानदार एंटीऑक्सीडेंट है। क्लोरोजेनिक एसिड इन गुणों का मुख्य कारण है। क्लोरोजेनिक एसिड शरीर के अंदर मुक्त कणों के कारण होने वाले नुकसान को कम कर देता है।
  • रक्त शर्करा के प्रबंधन में ग्रीन कॉफी के लाभ- ग्रीन कॉफी बीज सत से रक्त शर्करा में काफी कमी आती है, जिससे टाइप II के मधुमेह का खतरा कम हो जाता है।
  • रक्तचाप को कम करने में ग्रीन कॉफी के लाभ -ग्रीन कॉफी को रक्तचाप को कम करने में एक प्रभावी एजेंट के रूप में भी शामिल किया जाता है।
ग्रीन कॉफी फली: क्या इस वजन घटाने के सप्लिमेंट के फायदे इसके जोखिम से ज़्यादा हैं?
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3 thoughts on “ग्रीन कॉफी फली: क्या इस वजन घटाने के सप्लिमेंट के फायदे इसके जोखिम से ज़्यादा हैं?

  1. मधु

    इससे सैल्यूलाइट भी कम हो जाता है क्या? क्या इसके बाद स्किन लटक जाती है? और इसको खरीदते कहाँ से हैं? क्या कोई मेरे सवालों का जबाब दे सकता है प्लीज?

    Reply
  2. सुनीता

    Green Coffee कैप्सूल 2 हफ्ते पहले डाक से आ गए थे। निर्देशों के अनुसार मैं सुबह नाश्ते की जगह इन्हें लेती हूँ। असर अभी से दिखने लगा है। मैंने 12 किलो कम कर लिए हैं, और मैं अभी कैप्सूल लेना चालू रखूंगी। मैं भी एक शानदार बॉडी चाहती हूँ।

    Reply
  3. सुनीता

    मैंने इंस्टैंट Green Coffee का कोर्स छः महीने पहले किया था, यदि आपको भी वापस वजन चढ़ने से डर लगता है तो मैं आपको भरोसा दिला सकती हूँ कि अधिक वजन वापस नहीं आएगा। इस प्रोडक्ट की क्वालिटी बहुत ही बढ़िया है और इसमें सिर्फ नैचुरल पदार्थ ही मिले हैं। सबसे बड़ी बात तो ये है कि आप जो मर्जी वो खा सकती हैं और इसमें कोई प्रतिबंध नहीं होते। मैं बहुत खुश हूँ

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